( Skin infections in Hindi) स्किन इन्फेक्शन क्या होता है?त्वचा संक्रमण रोग होने पर किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

आपकी त्वचा आपको रोगाणुओं से बचाने का काम करती है लेकिन कई बार वह खुद ही रोगाणुओं से संक्रमित हो जाती हैं यदि त्वचा पर कोई कट या खरोच लगी हुई है तो आपको इससे स्किन इन्फेक्शन हो सकती हैं।
 त्वचा में कट या खरोच लगने के कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं जैसे त्वचा पर किसी तेज धार वाली धातु से चोट लगना, टैटू बनवाना ,कान नाक छिदवाना ,कीट का डंक मारना या जानवर द्वारा काट लेना आदि।
 जब आपकी त्वचा संक्रमित होती है तब आपको त्वचा में जलन लालिमा खुजली पस निकलना आदि जैसे लक्षण होने लग जाते हैं।
डॉक्टर आप की जांच करने के दौरान आपसे आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी लेंगे और आपको कौन-कौन से लक्षण महसूस हो रहे हैं ये सवाल पूछेंगे। इसके अलावा डॉक्टर कुछ अन्य टेस्ट भी कर सकते हैं जैसे कंपलीट ब्लड काउंट टेस्ट,बैक्टीरियल ब्लड कल्चर टेस्ट और पस कल्चर, सेंसटिविटी टेस्ट आदि।
सामान्य स्वच्छता अपनाकर स्किन इन्फेक्शन से बचाव किया जा सकता है बार-बार हाथ धोने की आदत और अपने तोलिए वे कपड़ों को किसी के साथ शेयर ना करना सामान्य स्वच्छता के कुछ उदाहरण है।
इसके इंफेक्शन के इलाज में मुख्य रूप से एंटीबायोटिक दवाइयों का उपयोग किया जाता है इन दवाइयों को ऑरल या इंट्रावेनस के रूप में दी जा सकती हैं इंट्रावेनस दवाओं को आमतौर पर मरीज को अस्पताल में भर्ती करके ही दिया जाता है इसके अलावा आपको इंफेक्शन की जगह पर लगाने के लिए एंटीसेप्टिक मलहम भी दी जाती हैं। यदि स्किन इन्फेक्शन का इलाज जल्दी से जल्द ना किया जाए तो शरीर कई हिस्से तक फैल सकता है।

स्किन इन्फेक्शन क्या है ?
स्किन इन्फेक्शन मुख्य रूप से बैक्टीरिया वायरस या फंगस के कारण होता है और शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है यह इन्फेक्शन आमतौर पर त्वचा में कट या खरोच या चोट लगने के बाद शुरू होता है जिन लोगों को डायबिटीज है, प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने वाला कोई रोग है तो उनको इन्फेक्शन होने की संभावना अधिक होती है। इंफेक्शन के कारण त्वचा में लालिमा खुजली व सूजन होने लग जाती हैं और मवाद बन जाता है।
स्किन इन्फेक्शन कितने प्रकार का होता है ?
बैक्टीरियल इन्फेक्शन का इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है मरीजों को यह दवाई खाने की टेबलेट या लगाने की क्रीम के रूप में दी जा सकती हैं इन बैक्टीरियल इनफेक्शन के उदाहरण सेल्यूलाइटिस, बालतोड़ ,कुष्ठ रोग
वायरल स्किन इनफेक्शन है।
अगर ये गंभीर नहीं है तो अक्सर अपने आप ही ठीक हो जाता है।
 वायरल इंफेक्शन में निम्न इंफेक्शन शामिल है चिकन पॉक्स, सिंगल्स, मस्से,खसरा, हाथ पैर और मुंह पर होने वाले रोग।
फंगल इंफेक्शन आमतौर पर शरीर के नम अंगो में ही होता है इसका इलाज आमतौर पर एंटीफंगल दवाओं से किया जाता है।
 फंगल इंफेक्शन के कुछ उदाहरण निम्न है एथलीट फुट, हीस्ट इनफेक्शन, दाद,नेल फंगल, ओरल थ्रश
त्वचा में परजीवी संक्रमण छोटे कीट आदि के काटने पर होता है जैसे जू, खटमल ,स्केबिज आदि।

स्किन इन्फेक्शन के लक्षण क्या हैं ?
स्किन इन्फेक्शन के दौरान आपको प्रभावित त्वचा में खुजली ,दर्द महसूस हो सकता है और त्वचा को छूने पर दर्द और बढ़ जाता है स्किन इन्फेक्शन में त्वचा पर फफोले बन सकते हैं और उनके फूटने के बाद उन पर ब्राउन रंग की पपड़ी बन जाती है यह शरीर के कई अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकता है जैसे चेहरा, बांहें और टांगे आदि यह शरीर के उन क्षेत्रों में भी हो सकता है जो आमतौर पर नम रहते हैं जिसे कांख, गर्दन की त्वचा में पड़ने वाली सलवटे और जननांग वे जांघों के बीच की त्वचा आदि
स्किन इन्फेक्शन के सामान्य लक्षण और संकेत निम्न है
त्वचा में लालीमा या रंग बिगड़ना,सूजन होना त्वचा गलना या पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होना,दर्द होना छूने पर दर्द और ज्यादा बढ़ जाना ,त्वचा पर पपड़ी बनना और खुजली होना, फुंसी याद आना और उससे पस निकलना।
इस क्षेत्र की त्वचा कठोर वे टाइट हो जाती हैं और घाव के अंदर से खून की धारियों के निशान बन जाते हैं घाव में इन्फेक्शन होने के कारण बुखार भी हो सकता है ऐसा खासकर तब होता है जब इंफेक्शन खून में फैल जाता है।

डॉक्टर को कब दिखाएं ?
यदि आपको नीचे दी गई समस्याओं में से कोई समस्या महसूस हो रही है तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखा ले
• यदि खरोच या कट के आसपास की त्वचा में लालिमा व सूजन आ गई है और छूने से दर्द महसूस होता है।
• यदि प्रभावित त्वचा में लाल लकीरे बन गई हैं।
• यदि घाव में पस बनने लगा है।
• यदि इंफेक्शन तेजी से फैलता जा रहा है या घाव बदतर होते जा रहा है।
•  यदि त्वचा में कोई खरोच या कट 1 हफ्ते से ज्यादा दिनों तक भी ठीक नहीं हुआ है।
• यदि आप प्रभावित त्वचा वाले अंग को ठीक से हिला नहीं पा रहे हैं या उस को ठीक से महसूस नहीं कर पा रहे हैं।
• यदि आप को बुखार है या आप स्वस्थ महसूस नहीं कर रहे हैं।

स्किन इन्फेक्शन क्यों होता है  ?
बैक्टीरियल स्किन इनफेक्शन तब होता है जब त्वचा में कहीं चोट खरोच लगी हो और बैक्टीरिया उसके अंदर चले जाएं।
 यदि आपकी त्वचा पर कोई खरोच या चोट लगा है तो इसका मतलब जरूरी नहीं कि आपको बैक्टीरियल इनफेक्शन होगा लेकिन यदि आप की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है तो आपको बैक्टीरियल इनफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है किसी बीमारी के कारण या किसी दवा के साइड इफेक्ट के रूप में भी आप की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती हैं।
आपकी त्वचा के अंदर और बाहर ही वातावरण के अंदर अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के बैक्टीरिया पाए जाते हैं कई बार आपकी त्वचा में होने वाले बैक्टीरिया वातावरण के कारण बालतोड़ जैसे स्किन इंफेक्शन हो जाता है इन्फेक्शन छोटा होता है जो आराम से ठीक हो जाता है लेकिन कई बार यह बड़ा वह गंभीर हो जाता है।
जो कई बार शरीर के अन्य भागों या खून में फैल जाता है।
कभी-कभी आपके बच्चे की त्वचा पर किसी प्रकार का कट या खरोच लग सकती है या फिर कोई कीड़ा भी काट सकता है इस स्थिति में होने वाले घाव को यदि साफ, ढक कर रखा जाए तो वह ठीक हो जाता है यदि वह बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाता है तब सेल्यूलाइटिस या इम्पेटिगो जैसे गंभीर स्किन इन्फेक्शन हो सकते हैं।
• बैक्टीरिया निम्नलिखित माध्यम से दूसरों में भी फैल सकते हैं
°त्वचा से करीबी संपर्क से 
°तोलिया या टूथब्रश जैसी चीजें शेयर करने से
 °खांसी के दौरान मुंह से पानी की सूक्ष्म बूंदे हवा में मिलने और उस हवा में किसी अन्य व्यक्ति के सांस लेने से आदि

स्किन इन्फेक्शन होने का खतरा कब बढ़ता है ?
कुछ लोगों में स्किन इन्फेक्शन होने का खतरा विशेष रूप से अधिक होता है जैसे :
•डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में जिनके शरीर में खून का बहाव कम हो जाता है विशेष रूप से हाथों व पैरों में और खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है।
•वह लोग जिनकी उम्र अधिक हो गई है वृद्धावस्था में।
 •एचआईवी एड्स या हेपेटाइटिस से ग्रस्त लोगों में या प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधित अन्य किसी बीमारी से ग्रस्त लोगों में।
 •वह लोग जिनका कीमोथेरेपी से इलाज हो रहा है या कोई अन्य दवा ले रहे हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली के असर को कम कर देती हैं।
 •कम गतिविधि करने वाले लोग जैसे लकवा से ग्रस्त या बिस्तर पर पड़े लोग।
 •कुपोषण से ग्रस्त लोग।
•त्वचा का जो हिस्सा चोट लगने से या सूरज की रोशनी से क्षतिग्रस्त हुआ है उनमें स्किन इन्फेक्शन होने की संभावना अधिक होती हैं।
स्किन इन्फेक्शन की बचाव कैसे करें ?
नियमित रूप से अपने हाथों को अच्छे से धोना स्किन इन्फेक्शन से बचाव करने का एक अच्छा तरीका है स्किन इन्फेक्शन से बचाव करने में मुख्य रूप से त्वचा को साफ रखना और जो चोट लगने से बचना शामिल है। 
• त्वचा में कोई चोट होने पर तुरंत साबुन से धो लेना चाहिए और फिर उसे एक स्वच्छ पट्टी से साफ़ कर लेना चाहिए।
 • एक्सरसाइज के उपकरण आदि जैसी चीजों को सीधे त्वचा पर ना लगने दे ऐसी चीजों से दूर है जो दूषित हो सकती हैं।
• साबुन ,रेजर ,र्टूथब्र्स,तौलिया और अन्य पर्सनल चीजों को अन्य लोगों के साथ शेयर ना करें।
• नहाने के दौरान इस्तेमाल किए गए तोलीये को फिर से उपयोग करने से पहले धो लें।

स्किन इन्फेक्शन का परीक्षण कैसे किया जाता है  ?
स्किन इन्फेक्शन के कारण का सटीक रूप से पता लगाने के लिए एक अच्छा मेडिकल टेस्ट करना आवश्यक हैं।
 डॉक्टर इंफेक्शन की जगह वह घाव आदि को देखकर ही स्किन इन्फेक्शन के प्रकार की पहचान कर लेते हैं।
परीक्षण के दौरान डॉक्टर आपसे लक्षणों के बारे में पूछ सकते हैं और घाव चकत्ते या फुंसी आदि की बारीकियों से जांच कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए दाद अक्सर गोलाकार का पापड़ी दार होता है कुछ अन्य मामलों में स्किन इन्फेक्शन का पता लगाने के लिए प्रभावित त्वचा में से उत्तक का सैंपल ले लिया जाता है और उसकी जांच की जाती हैं।
 हल्के स्किन इन्फेक्शन में ऊपरी त्वचा होने वाले इन्फेक्शन की जांच आमतौर पर शारीरिक परीक्षण लक्षणों और अवधि के आधार पर की जाती है जांच के दौरान यह सटीक रूप से पता नहीं लग पाता कि किस रोगाणुओं के कारण इंफेक्शन हुआ है और इसके लिए कौन सा इलाज प्रभावी रहेगा इसके बारे में सटीक जानकारी के लिए लैब टेस्ट करवाने की आवश्यकता पड़ती है।

स्किन इन्फेक्शन की जांच करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लैबोरेट्री टेस्ट कौन से हैं  ?
• बैक्टीरियल कल्चर 
• माइक्रोस्कोपिक परीक्षण 
• पस कल्चर
• एंटीबायोटिक सेंसटिविटी टेस्टिंग 
• फंगल कल्चर 
• ब्लड कल्चर 
• डायबिटीज ब्लड टेस्ट 
• कंपलीट ब्लड काउंट

स्किन इन्फेक्शन का इलाज कैसे किया जाता है  ?
त्वचा पर होने वाले बैक्टीरियल इनफेक्शन जैसे सेल्यूलाइटिस या इंपेटिगो आदि का इलाज करने के लिए सिर्फ एंटीबायोटिक दवाओं का ही उपयोग किया जाता है उस प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं जिनका उपयोग बैक्टीरियल इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए किया जाता है जैसे:
• Vancomycin 
• Linezolid
• Cephalosporins 
• Clindamycin 
• Doxycycline 
इसके अलावा आपको एंटीबायोटिक क्रीम भी दी जाती हैं जैसे क्लिंडामायसीन और मूपिरोसीन आदि।
यदि आपको लगाने या खाने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स दिया गया है तो उस कोर्स को निश्चित रूप से पूरा कर ले या जब तक डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक दवाई लेने को कहे आप लेते रहे।
ध्यान में रखें कि त्वचा के संक्रमण के प्रकार और उनकी गंभीरता के अनुसार इलाज के कोर्स का समय छोटा या बड़ा हो सकता है।
 यदि त्वचा में फंगल इंफेक्शन हुआ है तो उस पर एंटीफंगल क्रीम लगाने से पहले उस त्वचा को अच्छे से धो लें और फिर सुखाकर क्रीम लगाएं। डॉक्टर आपको खाने की टेबलेट के रूप में भी एंटी फंगल दवाई दे सकते हैं।

घरेलू देखभाल
• घाव जब तक पूरी तरह से ठीक ना हो जाए तब तक उसे साफ वस्तु की पट्टी से ढक कर रखें।
 • दिन में कई बार प्रभावित त्वचा की बर्फ से सिकाई करें ऐसा करने से सूजन और खुजली कम हो जाती हैं।
• खुजली को कम करने के लिए ओबीसी एंटीहिस्टामाइन दवाई ली जा सकती हैं।
 • मेडिकल स्टोर से कुछ प्रकार की मलहम क्रीम भी मिल जाती है जो त्वचा में खुजली व अन्य तकलीफें कम करने में मदद करती हैं।

स्किन इंफेक्शन से क्या समस्याएं होती हैं  ?
इससे होने वाली जटिलताएं त्वचा में संक्रमण के कारण पर निर्भर करती हैं ज्यादातर प्रकार के बैक्टीरिया इन्फेक्शन पर दवाई आसानी से काम कर जाती हैं लेकिन यदि त्वचा का संक्रमण आपकी त्वचा की गहराई के उत्तको तक पहुंच जाता है या आपके खून में फैल जाता है तो इससे गंभीर समस्या विकसित हो सकती हैं।
कुछ प्रकार के बैक्टीरिया जैसे एमआरएसए आदि से होने वाले संक्रमण का इलाज करना काफी मुश्किल हो जाता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोधी  होती हैं जिस कारण से दवाई इन पर असर नहीं करती है।

पुरुषों में फंगल इन्फेक्शन के मुख्य रूप से तीन सामान्य प्रकार हैं :
 • पैरों में दाद की समस्या
•  जांघों के बीच खुजली होना 
• दाद /रिंगवर्म

 1. पैरों में दाद की समस्या
पैरों में होने वाली दाद की समस्या को एथलीट फुट या तीनिया पेडिस भी कहा जाता है यह सामान्य प्रकार का फंगल इंफेक्शन है जो पैरों को प्रभावित करता है एथलीट फुट की समस्या आम तौर पर उन लोगों को होती है जो खेलकूद से जुड़े होते हैं या अथिलीट होते हैं।
कई बार यह समस्या उन लोगों को भी होती है जो दिन भर जूते पहनकर ड्यूटी करते हैं।

• एथलीट फुट की समस्या के लक्षण हर इंसान में अलग तरह के हो सकते हैं सामान्य लक्षण निम्न है :
               प्रभावित हिस्से में लाल निशान या फोड़ा हो जाना,  स्कीन के कुछ हिस्से का मुलायम होना,
स्किन की परतों का टूटना या चटकना त्वचा की पपड़ी बनकर निकलना, पैरों में खुजली,जलन या चुभन का एहसास होना

• एथलीट फुट का निदान उपचार और रोकथाम: 
                     पैरों में होने वाली हर खुजली असल में एथलीट फुट नहीं होती हैं डॉक्टर आमतौर पर ऐसे इंफेक्शन की पहचान के लिए स्किन का छोटा टुकड़ा निकाल लेते हैं इसके बाद माइक्रोस्कोप से जांच करके इस बात की पुष्टि की जाती है कि किसी फंगल की मौजूद के के चिन्ह मिले या नहीं।
 इस प्रकार के कहीं फंगल हैं जिनकी वजह से एथलीट फुट की समस्या हो सकती हैं एथलीट फुट का इलाज आमतौर पर स्किन पर लगाई जाने वाली टॉपिकल क्रीम या ऑइंटमेंट से ही किया जाता है।
यह क्रीम सामान्यत मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाती है लेकिन गंभीर समस्या होने पर ऑरल दवाओं के सेवन की भी जरूरत पड़ती है।
 • कुछ मामलों में पैरों की देखभाल के लिए कुछ सामान्य नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है।
पैरों में हवा लगने देना, पैरों को सुखा रखना, साफ-सफाई का ख्याल रखना, हफ्ते में कुछ दिन सैंडल पहनना आदि शामिल है।

2. जांघों के बीच खुजली होना
जांघों के बीच खुजली होना यह फंगल इंफेक्शन का अन्य बेहद सामान्य प्रकार है इस फंगी को नम और हल्का गर्म वातावरण बेहद पसंद होता है इसलिए यह शरीर के उन हिस्सों में ज्यादा फैलता है जहां पसीना या नमी अच्छी मात्रा में मौजूद होती हैं जैसे  हिप्स ,जांघों के बीच का हिस्सा, बगल आदि।

• लक्षण :
गुप्तांगो ,हिप्स और जांघों के आसपास लालिमा दिखना ,खुजली, जलन, चुभन, सूजन या बेचैनी होना।
गोल चक्तता पड़ना जिसके किनारे उभरे हुए हो स्किन का फटना, पपड़ी निकलना या सूजन आना।

• उपचार :
जॉक इच का अलग ही लुक होता है डॉक्टर इसे देखते ही पहचान जाते हैं अगर डॉक्टर इसकी पुष्टि को लेकर कंफर्म नहीं होते हैं तो वह स्किन की सैंपल की जांच कराकर इस बीमारी की पुष्टि करते हैं। इसको आमतौर पर टॉपिकल दवाओं और सही हाइजीन मेंटेन करके ठीक करने की कोशिश की जाती हैं जबकि कुछ गंभीर मामलों में डॉक्टर से मिलकर दवा लेने की भी जरूरत पड़ सकती हैं।इसके अलावा स्किन को साफ और ड्राई रखकर भी फंगल को खत्म किया जा सकता है।
 इससे बचने के लिए नेचुरल फाइबर यानी सुति या लेनिन से बने हुए ढीले अंडर वियर जैसे को पहनना शुरू करें ,इसके अलावा ऐसे लोगों के संपर्क में आने से बचे जो इस से संक्रमित हैं और ना ही उनकी इस्तेमाल की हुई चीजें जैसे तोलिया आदि का इस्तेमाल करें।

3. दाद की समस्या
दाद को तीनिया कॉरपोरिस भी कहा जाता है यह एक स्किन इंफेक्शन है जो डेड टीशु पर रहने वाले फंगस पर रहता है यह इनफेक्शन स्किन के साथ ही बालों और नाखूनों पर भी हो सकता है।
 जब भी यह शरीर के किसी भी हिस्से पर होती हैं तो इस इन्फेक्शन को रिंगवर्म कहा जाता है।

• लक्षण :
दाद स्किन इन्फेक्शन है जिसकी वजह से जो एथलीट फुट जैसी समस्याएं होती हैं रिंगवर्म को उसके आकार की वजह से आसानी से नोटिस किया जा सकता है यह एक लाल रंग का घोल चकता होता है जिसमें खुजली या पपड़ी निकलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। धीरे-धीरे इसके आसपास कहीं गोल चकते बन जाते हैं।
 इसी तरह से इसका विस्तार होता चला जाता है इस रिंग का बाहरी हिस्सा लाल होता है और कई बार उभरा हुआ भी दिख सकता है जबकि भीतरी हिस्से में सफेद रंग की पपड़ी दिखती हैं और कहीं बाहर चिकना पानी भी निकल सकता है।
 रिंगवर्म बेहद संक्रामक रोग होता है और इसकी हमसे स्किन का संपर्क होने पर यह समस्या हो सकती है।

• उपचार :
दाद के ज्यादातर मामलों को टॉपिकल क्रीम और मेडिकेटेड क्रीम लगा कर ठीक किया जा सकता है लेकिन ज्यादा गंभीर मामलों जैसे सिर में रिंगवर्म की समस्या होने पर डॉक्टर अन्य उपचार की सलाह देते हैं।
 बेसिक हाइजीन मेंटेन करके दाद का उपचार और रोकथाम की जा सकती हैं स्किन को साफ सुथरा और ड्राई रखकर स्किन इन्फेक्शन से बचा जा सकता है इसके अलावा पब्लिक बाथरूम और टॉयलेट के इस्तेमाल से बचना चाहिए। दूसरों के इस्तेमाल की हुई चीजें जैसे तौलिया, कपड़ों के इस्तेमाल से बचना चाहिए।
इसी प्रकार इस लेख में त्वचा संक्रमण की कुछ जानकारी दी गई है।

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