परिभाषा (Definition):
जन्म के समय हृदय की संरचना में मौजूद किसी भी प्रकार की विकृति को जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) कहते हैं।
यह हृदय की दीवारों, वाल्वों या रक्त वाहिकाओं में असामान्यता के कारण होता है, जिससे रक्त प्रवाह सामान्य नहीं रहता।
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कारण (Causes):
1. आनुवांशिक (Genetic factors):
परिवार में किसी को हृदय रोग होना।
क्रोमोसोमल विकृतियाँ जैसे – डाउन सिंड्रोम।
2. गर्भावस्था में संक्रमण:
खासकर रूबेला वायरस (German Measles) का संक्रमण।
3. माँ के द्वारा दवाओं, शराब या धूम्रपान का सेवन:
गर्भावस्था के दौरान हानिकारक पदार्थों का सेवन भ्रूण के हृदय विकास को प्रभावित करता है।
4. माँ का स्वास्थ्य:
डायबिटीज़, मोटापा, या थायरॉयड विकार।
5. रेडिएशन या विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना।
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लक्षण (Symptoms):
छोटे बच्चों में -
त्वचा, होंठ और नाखूनों का नीला पड़ना (Cyanosis)।
तेज़ या कठिन सांस लेना।
दूध पीने में कठिनाई।
वजन न बढ़ना।
अत्यधिक थकान।
बड़े बच्चों या वयस्कों में -
तेज़ धड़कन (Palpitations)।
बार-बार फेफड़ों का संक्रमण।
शारीरिक परिश्रम में जल्दी थकान होना।
बेहोशी के दौरे।
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मुख्य प्रकार (Types):
1. Atrial Septal Defect (ASD):
हृदय के ऊपरी दो कक्षों (Atria) के बीच की दीवार में छेद।
परिणामस्वरूप ऑक्सीजनयुक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त आपस में मिल जाता है।
2. Ventricular Septal Defect (VSD):
निचले दो कक्षों (Ventricles) के बीच की दीवार में छेद।
हृदय पर अतिरिक्त दबाव बनता है, जिससे हृदय विफलता हो सकती है।
3. Patent Ductus Arteriosus (PDA):
सामान्यतः जन्म के बाद एक रक्त वाहिका (Ductus Arteriosus) बंद हो जाती है।
PDA में यह वाहिका खुली रह जाती है, जिससे रक्त का प्रवाह उल्टा हो जाता है।
4. Tetralogy of Fallot (TOF):
चार दोषों का संयोजन होता है:
Ventricular Septal Defect (VSD)।
Pulmonary Stenosis।
Overriding Aorta।
Right Ventricular Hypertrophy।
यह सबसे सामान्य नीले रंग (cyanotic) रोगों में से एक है।
5. Pulmonary Stenosis:
फेफड़ों को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों का संकुचन।
इससे हृदय से फेफड़ों तक रक्त प्रवाह बाधित होता है।
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निदान (Diagnosis):
शारीरिक परीक्षण (Physical Examination): दिल की असामान्य ध्वनि (Murmur) सुनना।
Echocardiography (Echo Test): हृदय की संरचना और रक्त प्रवाह का अध्ययन।
Electrocardiogram (ECG): दिल की विद्युत गतिविधि का परीक्षण।
Chest X-ray: फेफड़ों और हृदय का आकार देखने के लिए।
Cardiac MRI / CT Scan: जटिल मामलों में।
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उपचार (Treatment):
1. दवाइयाँ (Medications):
दिल के कार्य को सहारा देने के लिए।
हार्ट फेलियर के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए।
2. सर्जरी (Surgery):
छेद बंद करना (Septal defect repair)।
वाल्व बदलना या मरम्मत करना।
रक्त प्रवाह को सही करने के लिए बाईपास करना।
3. कैथेटर आधारित प्रक्रिया (Catheter procedures):
बिना बड़े ऑपरेशन के दिल की मरम्मत।
4. लाइफस्टाइल और रेगुलर फॉलो-अप:
नियमित जाँच कराना।
संक्रमण से बचाव (Endocarditis prevention)।
संतुलित आहार और व्यायाम।
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रोकथाम (Prevention):
गर्भावस्था से पहले और दौरान सही देखभाल।
रूबेला जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण।
गर्भवती महिलाओं को नशे से दूर रहना चाहिए।
मधुमेह या अन्य बीमारियों का उचित नियंत्रण।
डॉक्टर की सलाह से दवाइयों का सेवन।
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संक्षेप में (Summary):
> जन्मजात हृदय रोग, समय पर पहचान और उपचार से काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। आजकल की उन्नत चिकित्सा तकनीकों से कई बच्चों और वयस्कों को सामान्य जीवन जीने का अवसर मिल रहा है।
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