Acute Kidney Injury (AKI) – किडनी की अचानक खराबी
परिभाषा (Definition):
AKI एक ऐसी स्थिति है जिसमें किडनी अचानक से काम करना कम या बंद कर देती है। इसका मतलब है कि किडनी रक्त को सही तरीके से साफ (फिल्टर) नहीं कर पाती, जिससे शरीर में ज़हरीले पदार्थ और पानी जमा होने लगते हैं।
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मुख्य कार्य जो प्रभावित होते हैं:
1. Blood से waste निकालना
2. Electrolytes का संतुलन बनाए रखना
3. BP कंट्रोल करना
4. RBC बनाने में मदद (Erythropoietin hormone)
AKI के प्रकार (Types of AKI):
1. Prerenal AKI:
Blood supply की कमी के कारण किडनी तक सही मात्रा में रक्त नहीं पहुँच पाता।
उदाहरण:
खून की कमी (Hypovolemia)
Heart failure
Sepsis (Infection)
जिगर की बीमारी (Liver Cirrhosis)
2. Intrinsic AKI:
जब खुद किडनी के टिश्यू डैमेज हो जाएं।
उदाहरण:
Glomerulonephritis
Toxins या दवाइयों से नुकसान (Nephrotoxic drugs)
Muscle breakdown – Rhabdomyolysis
3. Postrenal AKI:
Urine का रास्ता रुक जाता है, जिससे दबाव किडनी पर पड़ता है और काम करना बंद हो जाता है।
उदाहरण:
Kidney stone
Tumor
Prostate gland की सूजन
लक्षण (Symptoms):
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निदान (Diagnosis):
Serum Creatinine & BUN – ये AKI के मुख्य संकेत हैं
Urine output charting – पेशाब की मात्रा देखना जरूरी
USG Kidney – आकार और रुकावट जांचने के लिए
Electrolyte Test – Potassium, Sodium imbalance देखने के लिए
CT Scan / MRI / Biopsy – जरूरत के अनुसार
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इलाज (Treatment):
1. Fluid Management:
Normal Saline या RL दिया जाता है
Hypovolemia हो तो fluid देना जरूरी है
2. Diuretics:
Furosemide / Mannitol – पेशाब बढ़ाने के लिए
3. Electrolyte Correction:
High potassium (Hyperkalemia) हो तो:
Calcium Gluconate (दिल की सुरक्षा के लिए)
Insulin + Dextrose (Potassium को सेल्स में भेजता है)
Sodium Bicarbonate – blood को alkaline बनाने के लिए
4. Dialysis:
जब किडनी पूरी तरह बंद हो जाए या फ्लूड बहुत ज्यादा जमा हो जाए, तो मशीन से खून साफ किया जाता है।
5. रोकथाम:
Nephrotoxic drugs से बचना
Time पर infection का इलाज
High BP और diabetes को कंट्रोल में रखना
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Contrast Dye क्या है?
CT scan या angiography करते समय जो dye दी जाती है, वह कभी-कभी किडनी को नुकसान पहुँचा सकती है। इसलिए इसका उपयोग सोच-समझकर किया जाता है।
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Nursing Intervention:
Vital signs monitor करना
Intake/output record करना
Electrolyte imbalance पर ध्यान
Dialysis के लिए patient को तैयार रखना
Emotional support देना
Patient को ज्यादा प्रोटीन न देना (doctor के अनुसार diet manage करना)
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